एसआईआर की आपत्तियों में उलझे लोग, दस्तावेजों की दौड़ ने बढ़ाई परेशानी
आपत्ति दर्ज कराने का आज अंतिम दिन, हजारों लोग कागजों की तलाश में परेशान
काशीपुर। लंबे समय से चल रही एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया अब आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। मतदाता सूची में नाम, विवरण और पात्रता को लेकर सामने आ रही विभिन्न आपत्तियों के चलते लोग लगातार संबंधित केंद्रों और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। कई लोगों को अपनी आपत्ति के समर्थन में पुराने दस्तावेज, पहचान संबंधी प्रमाण और अन्य रिकॉर्ड जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 13 अगस्त यानी आज अंतिम दिन है। इसके बाद प्राप्त आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया 13 सितंबर तक चलने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब तक करीब 1.58 लाख दावे और आपत्तियां सामने आ चुकी हैं, जबकि नाम जुड़वाने के लिए करीब 82 हजार फॉर्म प्राप्त हुए हैं।
सबसे बड़ी चिंता उन लोगों की है जिनके नाम या विवरण को लेकर आपत्ति सामने आई है, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि किस दस्तावेज के आधार पर अपना पक्ष मजबूत करें। कई परिवार पुराने कागजात, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, निवास संबंधी रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की तलाश में जुटे हैं।

लोगों का सवाल—इतनी जटिल प्रक्रिया में आम मतदाता कैसे साबित करे अपना अधिकार?
स्थानीय लोगों का कहना है कि एसआईआर जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना है, लेकिन प्रक्रिया में दस्तावेजों और आपत्तियों की जटिलता के कारण आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्ग, मजदूर, ग्रामीण और ऐसे परिवार जिनके पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो रही है।
अब अंतिम दिन प्रशासन के सामने भी चुनौती है कि कोई पात्र मतदाता केवल दस्तावेजी कमी या प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए। लोगों ने मांग की है कि आपत्तियों की निष्पक्ष सुनवाई के साथ-साथ जरूरतमंद मतदाताओं को उचित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाए।
