उत्तराखंड। हाल ही में राहुल गांधी की “मोहम्मद दीपक” से हुई मुलाक़ात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता जानना चाहती है — क्या ये सिर्फ एक औपचारिक भेंट थी या फिर इसके पीछे कोई नया राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की तैयारी?
देश की जनता अब भावनाओं से नहीं, तथ्यों से जवाब चाहती है। मुलाक़ातें बंद कमरों में हों और बातें जनता से छुपी रहें — ये दौर अब बीत चुका है। आज का भारत पारदर्शिता मांगता है।
*जहाँ एक ओर उत्तराखंड में Pushkar Singh Dhami दिन-रात जनता के बीच रहकर विकास, सुशासन और पारदर्शिता की मिसाल पेश कर रहे हैं, वहीं कुछ नेता मुलाक़ातों की राजनीति में उलझे दिखते हैं।*
धामी जी की राजनीति साफ नीयत और स्पष्ट नीति की राजनीति है —
न कोई छुपाव,
न कोई बनाव,
सीधा संवाद,
जनता के साथ।
ये बात किसी से ना कहना…
अब ये लाइन पुरानी हो चुकी है।
आज जनता कहती है —
“सब बताना पड़ेगा, जवाब देना पड़ेगा।”
उत्तराखंड की जनता देख रही है कि कौन विकास की बात करता है और कौन सिर्फ सुर्खियों की।
राजनीति अब फोटो-ऑप की नहीं, परिणामों की होनी चाहिए।
