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रूद्रपुर 07 फरवरी, 2026  अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत बृजेन्द्र सिंह ने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987, भारतीय राजपत्र 20 मार्च 2015 एवं उत्तराखण्ड सरकार के शासनादेश दिनांक 14 फरवरी 2020 के परिप्रेक्ष्य में स्थायी लोक अदालत केवल जनउपयोगी सेवाओं से संबंधित वादों का श्रवण कर सकती है। इसके अलावा अन्य कोई वाद सुनने का क्षेत्राधिकार स्थायी लोक अदालत को नहीं है। उन्होने बताया कि वायु मार्ग, सड़क मार्ग व जल मार्ग के द्वारा यात्रियों एवं माल के वहन के लिए यातायत सेवा, डाक, तार या टेलीफोन सेवा, ऐसे स्थापन, जो जनता को बिजली, प्रकाश या पानी प्रदाय करते हो, सार्वजनिक मल वहन या स्वच्छता प्रणाली, अस्पताल उससे जुड़ा दवाई औषधि वितरण केंद्र (औषधालय) में दी गई सेवाएँ, बीमा सेवा, शैक्षिक या शैक्षणिक संस्थानों की सेवा, आवास और भू सम्पदा सेवा, बैंकिग एवं वित्तीय सेवा, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा में निम्नलिखित शामिल है राष्ट्रीयकृत/अनुसूचित/बहुराष्ट्रीय बैंक, गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनियां, चिट फंड और अन्य म्यूचुअल कंपनियां, निजी फाइनेंसर, सहकारी बैंक, बैंकिंग और ऋण प्रदान करने के व्यवसाय में लगी सहकारी समितियाफ उनके सदस्यों एवं ग्राहकों को सुविधाएं।

श्री सिंह ने बताया बैंकिंग या वित्तीय सेवा से सम्बंधित विवाद या मुद्दे जो स्थायी लोक अदालत द्वारा निस्तारित किये जा सकेगें-बैंकिग सेवाओं में कमी, सहमत ब्याज दर से अधिक ब्याज वसूलना, लॉकर आदि के बीमा के प्रावधान का अभाव, दोषपूर्ण एटीएम सेवाएँ, वाहन के संबंध में किस्तों के भुगतान में उधारकर्ता द्वारा चूक पर पेशी के माध्यम से एक वित्त कंपनी द्वारा वाहन को उठाना, ऋण की मंजूरी से पहले खाली चेक प्राप्त करना, पोस्ट डेटेड चेक प्राप्त करने की तारीख के बिना उधारकर्ता के खाते का कोई संतुलन नहीं होने के बाद पोस्ट डेटेड चेक प्राप्त करना, बैंको द्वारा अपने ग्राहकों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं की जानकारी रखने में विफलता। ग्राहकों को उचित सूचना के बिना विभिन्न सेवाओं के संबंध में नियमों और शतों को बदलना।

स्थायी लोक अदालत के लाभ- स्थायी लोक अदालत में सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनिय 1872 के प्रावधान लागू नहीं होते है। इस कारण वाद शीध्र निस्तारित होते है। बाद कारियों से कोई न्यायालय नहीं लिया जाता है, स्थायी लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है, स्थायी लोक अदाला का पंचाट सिविल न्यायालय की डिक्री के समान ही निष्पादित किया जायेगा।

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By admin