➡️ बिना वैध दस्तावेज़ 115 ट्रैक्टरों का व्यावसायिक में परिवर्तित।
➡️ परिवहन आयुक्त से शिकायत, बड़े प्रशासनिक घोटाले की आशंका।
काशीपुर: उधम सिंह नगर।
काशीपुर स्थित एआरटीओ कार्यालय से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 115 निजी ट्रैक्टरों को बिना वैध दस्तावेज़ों के व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
इस पूरे प्रकरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता आसिम अज़हर ने परिवहन आयुक्त कार्यालय को स्पीड पोस्ट के माध्यम से विस्तृत लिखित शिकायत भेजी है।
🔎 RTI में हुआ बड़ा खुलासा..?
शिकायत में बताया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त आधिकारिक उत्तर में स्वयं एआरटीओ कार्यालय काशीपुर ने यह स्वीकार किया है कि 01 जनवरी वर्ष 2025 से 23 दिसम्बर वर्ष 2025 के बीच
कुल 115 निजी ट्रैक्टरों को व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित किया गया,
लेकिन इन ट्रैक्टरों से संबंधित अनिवार्य पत्रावलियाँ जैसे वैध RC, बीमा, फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण प्रमाणपत्र
कार्यालय में संधारित ही नहीं हैं।
यह स्वीकारोक्ति अपने आप में गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की ओर इशारा करती है।
⚠️ कानून के उल्लंघन का आरोप।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बिना वैध दस्तावेज़ों के किसी भी वाहन को व्यावसायिक उपयोग में लाना
Motor Vehicles Act, 1988
Central Motor Vehicles Rules (CMVR)
तथा आरटीआई की धारा 4(1)(a) (रिकॉर्ड संधारण)
का सीधा उल्लंघन है।
इतना ही नहीं, इतने बड़े पैमाने पर रूपांतरण की पत्रावलियाँ न होना,
संभावित भ्रष्टाचार, विभागीय मिलीभगत और राजस्व हानि की आशंका को भी जन्म देता है।
🧾 प्रशासन से क्या माँग की गई है…?
परिवहन आयुक्त को भेजी गई शिकायत में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि 115 ट्रैक्टरों के व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित की विशेष जाँच कराई जाए
बिना वैध दस्तावेज़ किए गए रूपांतरणों को तत्काल निरस्त /निलंबित किया जाए
संबंधित एआरटीओ व लोक सूचना अधिकारियों की भूमिका तय कर विभागीय व दंडात्मक कार्यवाही की जाये व
जाँच रिपोर्ट की प्रति शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई जाये।
🗣️ शिकायतकर्ता का कहना..!!
शिकायतकर्ता आसिम अज़हर का कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, जनहित और सरकारी राजस्व से जुड़ा गंभीर विषय है।
यदि समय रहते निष्पक्ष जाँच नहीं हुई, तो मामला राज्य सूचना आयोग, सतर्कता विभाग और आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।”
अब सबकी निगाहें परिवहन विभाग पर..!
अब यह देखना अहम होगा कि परिवहन आयुक्त कार्यालय इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है।
क्या मामले की स्वतंत्र जाँच होगी
या फिर यह प्रकरण भी फाइलों में दबकर रह जायेगा…?
