नौकरी नहीं, फिर भी खुल गया पीएफ खाता! रुद्रपुर के चर्चित मामले ने फिर पकड़ा तूल
काशीपुर के व्यक्ति ने एसआईटी जांच की उठाई मांग, अदालत के आदेश के बाद मामले की दोबारा जांच के निर्देश
सुभाष ठाकुर| काशीपुर/रुद्रपुर।
रुद्रपुर में कथित फर्जी पीएफ (भविष्य निधि) खाता खोलने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। बिना नौकरी किए ही पीएफ खाता खोले जाने और उसमें कथित अनियमितताओं के आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। प्रकरण में न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पुलिस को दोबारा जांच के निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, काशीपुर के एक व्यक्ति ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग उठाई है।
प्राप्त समाचार विवरण के अनुसार, काशीपुर निवासी व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उसकी जानकारी और वास्तविक रोजगार के बिना ही उसके नाम पर पीएफ खाता खोल दिया गया। आरोप है कि संबंधित फर्म में उसने कभी काम नहीं किया, इसके बावजूद दिसंबर 2020 से उसे कार्यरत दर्शाकर पीएफ खाता संचालित किया गया। इस पूरे प्रकरण में संबंधित दस्तावेजों के इस्तेमाल और खाते खोले जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
पुलिस की पूर्व जांच पर भी उठे सवाल
मामले में दर्ज एफआईआर की जांच के दौरान पुलिस ने पहले इसे क्लेरिकल मिस्टेक बताते हुए अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। समाचार में प्रकाशित विवरण के मुताबिक, 19 सितंबर को तत्कालीन एसएसपी रुद्रपुर ने पुलिस की रिपोर्ट को खारिज करते हुए थाना अध्यक्ष को सक्षम अधिकारी से अग्रिम विवेचना कराने के निर्देश दिए थे। न्यायालय के आदेश के आधार पर मामले की जांच कराए जाने की बात भी सामने आई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उसके नाम पर पीएफ खाता किस आधार पर खोला गया, संबंधित दस्तावेज कहां से प्राप्त हुए और खाते के संचालन में किन लोगों की भूमिका रही।
मुख्यमंत्री और डीजीपी तक पहुंचा मामला
समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रजत सिंह ने सीएम पोर्टल, मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र भेजकर मामले की एसआईटी जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में भी फर्जी पीएफ खाते खोले जाने और करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़े मामले सामने आए हैं। इन आरोपों की वास्तविकता और इस प्रकरण से उनके संबंध की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
निष्पक्ष जांच से सामने आएगा सच
मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि यदि संबंधित व्यक्ति ने वास्तव में उस फर्म में नौकरी नहीं की, तो उसके नाम पर पीएफ खाता किन दस्तावेजों के आधार पर खोला गया? क्या यह केवल लिपिकीय त्रुटि थी या इसके पीछे किसी स्तर पर गंभीर अनियमितता हुई? इन सवालों का जवाब दस्तावेजों की जांच, संबंधित पक्षों के बयान और वित्तीय रिकॉर्ड के परीक्षण से ही सामने आ सकता है।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और अंतिम निष्कर्ष जांच पर निर्भर हैं। शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराकर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित हो तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
