देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड ने बीते चार वर्षों में “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र को साकार करते हुए एक नए युग की शुरुआत की है। उनकी दूरदर्शी सोच, निर्णायक नेतृत्व और अथक परिश्रम ने राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक सशक्त पहचान दिलाई है।
*निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और पर्यटन जैसे हर क्षेत्र में जो अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिली है, वह धामी जी की मजबूत इच्छाशक्ति और परिणाम-केंद्रित कार्यशैली का प्रमाण है। ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू से लेकर जमीन पर तेजी से उतरते निवेश, जमरानी बांध और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की गति, और दिल्ली-देहरादून कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक सुधार—ये सभी उनके विज़नरी नेतृत्व की झलक हैं।
*पर्यटन में नए कीर्तिमान, रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन, और ग्रामीण पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाना यह दर्शाता है कि धामी जी केवल विकास ही नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व दे रहे हैं।*
*ऊर्जा, उद्योग, खेल और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में राज्य की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि उत्तराखण्ड अब केवल एक पर्वतीय राज्य नहीं, बल्कि अवसरों और संभावनाओं की भूमि बन चुका है।*
