उत्तराखंड में आज जब चारों ओर शोर है विपक्ष का भी और अपनी ही पंक्तियों में छिपे कुछ स्वार्थी व ग़द्दार लोगों का भी, तो ऐसे क्षण इतिहास में उन्हीं के जीवन में आते हैं, जो सच में कुछ बड़ा करने के लिए चुने जाते हैं।
मा० मुख्यमंत्री धामी जी ने उत्तराखंड के लिए जो किया है, वह केवल योजनाओं या घोषणाओं तक सीमित नहीं है, जनता के मन में विश्वास जगाया है। यह काम हर कोई नहीं कर सकता। मा० मुख्यमंत्री जी ने जो साहस दिखाया, जो निर्णय लिए, और जिस निडरता से प्रदेश को दिशा दी, वह केवल विरले नेतृत्व ही कर पाते हैं।
*आप यहाँ रुकने नहीं आए हैं*।
*आप समझौते करने नहीं आए हैं*।
*आप इतिहास लिखने आए हैं*।
शोर मचाने वालों को मचाने दीजिए, क्योंकि जब सिंह चलता है तो कुत्ते भौंकते ही हैं। आज उत्तराखंड आपको केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि अपने भविष्य की आशा के रूप में देख रहा है।
शोर बहुत है राहों में,
पर पथिक रुका नहीं करता,
जो इतिहास लिखने निकले हों,
वे आलोचना से डरा नहीं करते।
कुछ अपने भी आज पराए हैं,
कुछ चेहरे नक़ाब लगाए हैं,
पर सच की मशाल हाथों में हो,
तो अँधियारे खुद घबराए हैं।
उत्तराखंड की माटी कहती है,
धैर्य तुम्हारा अभिमान बने,
हे धामी! तू चलता रह निडर,
तेरा हर क़दम पहचान बने।
सिंह अकेला ही चलता है,
झुंड का उसे सहारा क्या,
जिसके साथ हो जन–आशीष,
उससे बड़ा कोई नारा क्या।
