🔶 राष्ट्रधर्म का उद्घोष
“समाज ही राष्ट्र की आत्मा है” — संगठित समाज ही सुरक्षा की गारंटी
व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्रीय पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त
🔶 वीरों के संग वैचारिक संगम
सेवानिवृत्त जनरल, वाइस एडमिरल, ब्रिगेडियर सहित सैन्य नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति
सैकड़ों पूर्व सैनिकों का सैन्य वेश में राष्ट्रभाव से ओतप्रोत सहभाग
🔶 सुरक्षा और स्वाभिमान
अग्निवीर योजना में अनुभवाधारित परिमार्जन की आवश्यकता
कश्मीर भारत की अखंड अस्मिता का प्रतीक
सीमाओं के साथ समाज की भी सजग सुरक्षा जरूरी
🔶 समरस समाज, सशक्त भारत
मंदिर, जलस्रोत और श्मशान — सभी के लिए समान अधिकार
“वसुधैव कुटुंबकम्” भारतीय चिंतन का मूल
संवाद और शास्त्रार्थ से ही वैचारिक स्पष्टता
🔶 चरित्र ही राष्ट्र की पूंजी
भ्रष्टाचार व्यवस्था नहीं, नियत की समस्या
संस्कार, संयम और सेवा से राष्ट्रनिर्माण
स्वार्थ त्याग कर परोपकार में आनंद की साधना
🔶 शताब्दी वर्ष का आह्वान
1,30,000 से अधिक सेवा प्रकल्पों से जुड़ने का संदेश
सीमाओं के प्रहरी अब समाज के भी पथप्रदर्शक बनें
“संघ का उद्देश्य प्रचार नहीं, राष्ट्र उत्थान है”
