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शिक्षा नीति को ताक पर रखकर निजी स्कूलों की मनमानी, अभिभावक त्रस्त—सरकार की नीतियाँ काग़ज़ों में सिमटीं

काशीपुर (उधम सिंह नगर)।

राज्य सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और छात्र-हितैषी बनाने के तमाम दावों के बीच काशीपुर क्षेत्र में निजी स्कूलों की मनमानी खुलकर सामने आ रही है। शिक्षा नीति और विभागीय निर्देशों को दरकिनार करते हुए कई प्राइवेट स्कूल अभिभावकों और छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं, जिससे शिक्षा का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ गया है।

 

सूत्रों के अनुसार, निजी स्कूलों द्वारा छात्रों को महँगी किताबें और स्कूल यूनिफॉर्म एक ही निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। अभिभावकों के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा जाता—न मानने पर बच्चों के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके अलावा “सुविधा शुल्क”, “फैसिलिटी फीस” और “एनुअल चार्ज” जैसे नामों पर अलग-अलग मदों में मनमाने शुल्क वसूले जा रहे हैं, जिनका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा या वैधानिक आधार नहीं बताया जाता।

 

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अब कुछ स्कूलों ने एडमिट कार्ड को फीस वसूली का औज़ार बना लिया है। आरोप है कि यदि अभिभावक एडवांस फीस जमा नहीं करते, तो बच्चों को परीक्षा देने से रोकने की चेतावनी दी जाती है। इतना ही नहीं, कई मामलों में फीस जमा न होने पर छात्रों को कक्षा से बाहर खड़ा करना या सहपाठियों के सामने अपमानित करना—मानसिक प्रताड़ना के समान—बताया जा रहा है। यह न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि बाल अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

 

अभिभावकों का कहना है कि सरकार निजी स्कूलों पर लगाम लगाने के लिए नियम तो बनाती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत और अनदेखी के कारण नियमों का पालन नहीं हो पाता। शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने से स्कूलों के हौसले बुलंद हैं।

 

शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसी प्रथाएँ शिक्षा को सेवा से व्यवसाय में बदल रही हैं। परीक्षा से वंचित करने या मानसिक दबाव बनाने जैसे कदम बच्चों के मनोवैज्ञानिक विकास पर गंभीर असर डालते हैं। यह स्थिति तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती है।

 

समाज और सरकार के लिए संदेश

अब समय आ गया है कि अभिभावक, सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधि एकजुट होकर आवाज़ उठाएँ। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह शिकायतों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई करे, फीस संरचना पारदर्शी बनाए, और एडमिट कार्ड/परीक्षा को किसी भी प्रकार की फीस वसूली से अलग रखे।

उत्तराखंड सरकार से अपेक्षा है कि वह बच्चों के अधिकारों की रक्षा करते हुए निजी स्कूलों की मनमानी पर ठोस लगाम लगाए—ताकि शिक्षा भय और दबाव नहीं, बल्कि समान अवसर और सम्मान का माध्यम बने।

By admin